UP के इस मंत्री के बयान पर कुमार विश्वास ने ली चुटकी बोले, 'इन्हें नोबेल मिलना चाहिए'





योगी के मंत्री के इस बयान पर ट्वीटर पर लोग चुटकी ले रहे हैं.

नई दिल्ली: प्रदूषण (Pollution) के जहर से आधा हिंदुस्तान जूझ रहा है . दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, बिहार समेत तकरीबन आधे हिंदुस्तान की आबोहवा में लोगों का दम घुट रहा है. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में तो प्रदूषण सीवियर कंडीशन (Pollution Severe Condition) तक पहुंच चुका है.

हर सुबह धुंध के छंटने का इंतजार होता है. ऐसे में जहां केंद्र और राज्य सरकार प्रदूषण को कम कैसे किया जाए इस पर मंथन कर रही हैं, वहीं, यूपी सरकार के मंत्री सुनील भराला (Sunil Bharala) के प्रदूषण कम करने को लेकर दिए गए बयान की आलोचना हो रही है. भराला के बयान पर कवि कुमार विश्वास (Kumar Vishwas) ने भी ट्विटर पर तंज कसा है.

 











Dr Kumar Vishvas

@DrKumarVishwas









ये @NobelPrize वाले भी बडे पक्षपाती हैं ! ऐसे-ऐसे युग-वैज्ञानिक सरकार चला रहे हैं और इन्हें एक नोबेल तक नहीं देती ? जब सारे देवता इंद्र के भरोसे हैं तो फिर हम भारतीयों की क्या बिसात ?😍🙏 https://twitter.com/ANINewsUP/status/1190905712458813441 









ANI UP

@ANINewsUP




#WATCH Uttar Pradesh minister Sunil Bharala: Farmers have always practiced stubble burning, it's a natural system. Repeated criticism of it is unfortunate. Govts should hold 'Yagya' to please Lord Indra (God of rain), as done traditionally. He (Lord Indra) will set things right.












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कवि कुमार विश्वास ने ट्विटर पर ट्वीट करते हुए एक वीडियो शेयर किया और कहा, 'ये @NobelPrize वाले भी बड़े पक्षपाती हैं ! ऐसे-ऐसे युग-वैज्ञानिक सरकार चला रहे हैं और इन्हें एक नोबेल तक नहीं देती ? जब सारे देवता इंद्र के भरोसे हैं तो फिर हम भारतीयों की क्या बिसात?'

दरअसल, प्रदूषण के बढ़ते स्तर को कम करने के लिए योगी के मंत्री सुनील भराला ने एक नायाब तरीका निकाला. उन्होंने एक कहा कि अगर हमें प्रदूषण को कम करना है तो इसके लिए सरकार को पहले यज्ञ कराना चाहिए. ताकि इस यज्ञ से इंद्र देव प्रसन्न हों और बारिश करवाएं. उन्होंने कहा था कि पराली जलाना प्राकृतिक प्रक्रिया है और इससे इस हद तक प्रदूषण नहीं होता. उन्होंने कहा, किसानों ने हमेशा से पराली जलाने का कार्य किया है और प्राकृतिक प्रक्रिया की बार-बार आलोचना दुर्भाग्यपूर्ण है.


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